हनुमान जी के विविध मंत्र और स्तोत्र
भगवान हनुमान को समर्पित अनेक स्तोत्र और मंत्र हैं। इनमें हनुमान चालीसा का पाठ अत्यंत लोकप्रिय है।
इस महान स्तोत्र की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी। उन्होंने हनुमान अष्टक और बजरंग बाण भी रचे। बहुत से लोग हनुमान सहस्रनाम का भी पाठ करते हैं, जिसमें उनके एक हजार नाम हैं।

हनुमान भक्तों में रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ भी प्रचलित है। ये सभी स्तोत्र हैं। सुंदरकांड और हनुमान सहस्रनाम जैसे कुछ पाठ लंबे हैं, जबकि बजरंग बाण और हनुमान चालीसा में लगभग ३० से ४० चौपाइयाँ अथवा पद हैं।
बहुत से लोग पूछते हैं कि क्या भगवान हनुमान को प्रसन्न करने का कोई सरल उपाय है?
हनुमान मंत्रों में फ्रौं बीज मंत्र का विशेष स्थान है। इसमें केवल एक अक्षर अर्थात् बीजाक्षर ‘फ्रौं’ है।
फ्रौं मंत्र के लाभ
श्रद्धापूर्वक फ्रौं मंत्र का जप करने से बुरी नजर दूर होने की मान्यता है। यह बीज भगवान हनुमान की उपस्थिति का आह्वान करता है। जहाँ उनका वास हो, वहाँ अशुभ प्रभाव नहीं टिकते।

उनकी भक्ति की शक्ति से वातावरण पवित्र होता है। उनकी गदा शारीरिक, मानसिक और सूक्ष्म स्तर के आघातों से रक्षा करती है।
भगवान हनुमान को भगवान शिव के ग्यारह रुद्रावतारों में से एक माना जाता है। उनकी उपासना महादेव की उपासना के समान मानी जाती है।
इसके अतिरिक्त हनुमान जी को प्रसन्न करके भगवान राम तक पहुँचना सहज होता है और उनकी सेवा का अवसर मिलता है। साकेत धाम नामक दिव्य लोक भौतिक ब्रह्मांड की सीमाओं से परे स्थित है।

फ्रौं मंत्र से उत्पन्न स्पंदन साधक के आध्यात्मिक आभामंडल को जागृत करते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ विनम्रता का आशीर्वाद माना जाता है।
लोग प्रायः विनम्रता को कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। फ्रौं मंत्र के जप से हृदय शुद्ध होता है। वह सकारात्मकता और ज्ञान ग्रहण करने का पात्र बनता है। विनम्रता के बिना यह संभव नहीं।
साथ ही यह मंत्र ढाल की तरह कार्य करता है। यह नकारात्मक व्यक्तियों और इरादों से रक्षा करता है तथा धर्म के पक्ष में दृढ़ रहने का आत्मविश्वास देता है।
श्री हनुमान की कृपा साधक पर प्रवाहित होने से वह निर्बल नहीं रहता। नकारात्मकता से मुक्त हृदय में रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए स्थान बनता है।

धर्म की रक्षा के लिए भगवान हनुमान ने अनेक असुरों का संहार किया। आज उन असुरों के प्रतीक हमारे भीतर छह विकारों के रूप में हैं। उसी प्रकार हनुमान जी की प्रार्थना साधक को धीरे-धीरे इन बाधाओं पर विजय पाने में सहायता करती है।
कुछ लोग मंत्र-साधना और देवता की उपासना को अलग मानते हैं, पर यह उचित नहीं। कलियुग में मंत्र-जप या नाम-जप भगवान की आराधना का प्रमुख मार्ग है।
इसलिए नियमित फ्रौं मंत्र-जप हनुमान उपासना से कम नहीं है। श्रद्धा और निष्ठा से जप करने पर साधक को वही हनुमान साधना के लाभ प्राप्त होते हैं।
हनुमान जी की प्रार्थना क्यों महत्त्वपूर्ण है
हनुमान जी कलाओं के अधिष्ठाता हैं
हनुमान जी की प्रार्थना जीवन के विविध क्षेत्रों में निपुणता प्रदान करती है। क्या आपने सोचा है कि भारत के अधिकांश कुश्ती अखाड़ों में भगवान हनुमान की पूजा क्यों होती है?

हनुमान जी अद्वितीय बल के स्वामी हैं और भक्तों को अपार शक्ति प्रदान करते हैं। इसी कारण पहलवान उनकी आराधना करते हैं।
बल के अतिरिक्त उनकी उपासना से रचनात्मक कलाओं का वरदान भी माना जाता है। देवर्षि नारद ने हनुमान जी को श्रेष्ठ गायक होने का आशीर्वाद दिया था। उनके शरणागत भक्त विविध कौशल और गुण प्राप्त करते हैं।
बाल्यकाल में देवताओं ने उन्हें सिद्धियाँ और ज्ञान प्रदान किए थे। हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं—‘अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता’।
अर्थात् आठ सिद्धियों और नौ निधियों को प्रदान करने वाले।
आठ सिद्धियाँ हैं—अणिमा (अत्यंत छोटा होना), महिमा (विशाल होना), गरिमा (भारी होना), लघिमा (भारहीन होना), प्राप्ति (बिना बाधा इच्छित स्थान पहुँचना), प्राकाम्य (इच्छाओं की सिद्धि), ईशित्व (आधिपत्य की शक्ति) और वशित्व (वश में करने की शक्ति)।
नौ निधियाँ ऐसे दिव्य खजाने माने जाते हैं जो कुबेर लोक में प्राप्त होते हैं और तांत्रिक साधना से सिद्ध किए जाते हैं।

अन्य महत्त्वपूर्ण लाभ
हनुमान भक्त को देखकर संकट दूर भागते हैं। श्री हनुमान को संकटमोचन भी कहा जाता है। भगवान की गदा की रक्षा में कोई अनिष्ट नहीं होता—ऐसी मंत्र की महिमा कही जाती है।
आध्यात्मिक स्तर पर मंत्र की शक्ति और अधिक प्रबल मानी जाती है। आत्मसाक्षात्कार की इच्छा रखने वाले भक्तों की हनुमान जी तत्परता से सहायता करते हैं।
भक्ति देखकर करुणामय प्रभु साधक पर शीघ्र कृपा करते हैं। किंतु रामभक्ति की याचना उन्हें विशेष प्रिय है। ऐसे भक्त से उनका घनिष्ठ संबंध बनता है और वे उसके साथ रहते हैं।

उदाहरण के लिए, मान्यता है कि हनुमान जी ने स्वयं तुलसीदास जी से रामकथा सुनी थी। यह प्रसंग उनके भक्तवत्सल स्वरूप में विश्वास को दृढ़ करता है।
एक आवश्यक सावधानी
ध्यान रखें, फ्रौं एक बीज मंत्र है। बीज मंत्रों में मंत्र की शक्ति बीज रूप में निहित होती है। इनकी ऊर्जा सीधी होती है, किसी अन्य माध्यम से संचालित नहीं।
गुरु के मार्गदर्शन के बिना इसका अभ्यास प्रतिकूल प्रभाव ला सकता है। इसलिए गुरु की अनुमति के बिना फ्रौं मंत्र की साधना न करें।
तो हनुमान जी महाराज की सहायता कैसे प्राप्त की जाए?
ऐसी स्थिति में यंत्र-साधना की जा सकती है। साधक प्राणप्रतिष्ठित यंत्र का ध्यान और पूजन कर सकता है। इससे हनुमान जी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। इसके लिए इससे उपयुक्त और क्या होगा—हनुमान यंत्र?

श्री हनुमान यंत्र
- आध्यात्मिक संरक्षण में सहायक
- आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति बढ़ाने में सहायक
- हनुमान उपासना को अधिक उत्साह और शक्ति के साथ करने में सहायक
- बाधाओं से उबरने में सहायक
- अनुशासन और भक्ति बढ़ाने में सहायक
- पवित्र भोजपत्र पर हस्तनिर्मित
- पारंपरिक प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार
- यंत्र का आकार चुनें: 4×4″ कॉम्पैक्ट • 5×7″ स्टैंडर्ड • 8×10″ बड़ा भक्ति फ्रेम
- विशेष प्राप्तकर्ता के लिए व्यक्तिगत रूप से तैयार
- गुरुजी द्वारा मंत्र से ऊर्जित
- पूर्ण पूजा मार्गदर्शन शामिल
हनुमान यंत्र एक दिव्य यान की भाँति साधक को विकारों से जागरूकता की ओर, मन से चेतना की ओर उठाता है। यह परिवर्तन वास्तविक और लगभग रहस्यमय प्रतीत होता है।
श्री हनुमान की सेवा ही भगवान राम की सेवा है
हनुमान जी की आराधना से भगवान राम स्वयं प्रसन्न होते हैं। उनकी सेवा भगवान की सेवा के समान है। इसलिए रामभक्त पहले हनुमान जी की पूजा करते हैं। वे बाधाएँ दूर कर भक्ति का वरदान देते हैं।

जिस प्रकार कृष्णभक्त कृष्णभक्ति के लिए गौर-निताई की आराधना करते हैं, उसी प्रकार रामभक्त रामभक्ति के लिए हनुमान जी की पूजा करते हैं।
भगवान हनुमान सरलता और निष्कपटता के धाम हैं। उन्हें प्रसन्न करना सहज है, किंतु वे कपटी व्यक्तियों को अपने निकट नहीं आने देते। उनकी कृपा पाने वाला वास्तव में धन्य है।
हनुमान साधना बुद्धि और ज्ञान के विकास के लिए उपयुक्त मानी जाती है। हनुमान जी सूर्यदेव के शिष्य थे। वैदिक परंपरा में सूर्य भगवान को ज्ञान और प्रज्ञा का प्रतीक माना जाता है।

सूर्य का प्रकाश केवल किरणों का नहीं, ज्ञान के प्रकाश का भी प्रतीक है। हृदय अज्ञान और मोह के अंधकार से घिरा रहता है। ऐसे में हनुमान जी की उपासना मानो घोर अंधेरी रात में सूर्य का स्वागत करने जैसी है।
बजरंगबली भगवान राम के समान हैं। प्रयास में सच्चाई हो तो उन्हें प्रसन्न करना सहज माना जाता है।
हनुमान जी महाराज के दो स्वरूप
जानिए कि भगवान हनुमान के दो स्वरूप हैं। रामभक्त के रूप में उनका दर्शन प्रातःकालीन कमल की तरह शीतल और सौम्य होता है।
उनका एक उग्र तांत्रिक स्वरूप भी है। हनुमान जी तंत्र के भी अधिष्ठाता हैं। फ्रौं मंत्र के निरंतर जप से अपार साहस मिलने की मान्यता है।
भगवान हनुमान जपकर्ता की रक्षा करते हैं। राजस्थान में स्थित मेहंदीपुर बालाजी उनका प्रसिद्ध तांत्रिक मंदिर है।

हनुमान जी का यह स्वरूप शीघ्र लौकिक फल देने वाला माना जाता है। उनका फ्रौं बीज मंत्र शक्ति से भरपूर है और एकाग्रता तथा ध्यान की क्षमता बढ़ाने का साधन माना जाता है।
भक्त को दुर्लभ संपदा और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही बजरंगबली की कृपा से वैराग्य सहज विकसित होता है।

विरजा देवी दासी

रोहिणी देवी दासी

